हरियाणा सरकार ने धान खरीद और चावल मिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसी कड़ी में करनाल सहित प्रदेशभर की राइस मिलों की निगरानी अब PDS-2 प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मिलों के संचालन और स्टॉक की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाएगी।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से जारी निर्देशों के तहत राइस मिलों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में 198 विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें निर्धारित समय सीमा के भीतर मिलों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन अभियान लगभग एक सप्ताह तक चलेगा। इस दौरान धान और चावल के स्टॉक, रिकॉर्ड, मिलिंग प्रक्रिया तथा सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की जांच की जाएगी। PDS-2 प्रणाली के जरिए प्राप्त आंकड़ों और भौतिक निरीक्षण के निष्कर्षों का मिलान भी किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या सरकारी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित राइस मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निगरानी और भौतिक सत्यापन के संयुक्त मॉडल से खाद्यान्न प्रबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सकेगा।
फिलहाल सभी संबंधित अधिकारियों और टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आने वाले दिनों में निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
