गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक ने देश की शिक्षा व्यवस्था और शासन प्रणाली को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि शासन चलाने का तरीका भी बदलना होगा।”
वांगचुक ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी बदलाव का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। उनके अनुसार, यदि व्यवस्था में स्थायी सुधार लाना है तो केवल व्यक्तियों के बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नीतियों और शासन की कार्यशैली में भी व्यापक बदलाव आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं, छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को गंभीरता से सुनना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। वांगचुक का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनभागीदारी को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, आगे का अभियान केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े व्यापक विषयों पर केंद्रित होगा।
वांगचुक ने लोगों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सकारात्मक बदलाव संवाद, जनभागीदारी और जिम्मेदार नेतृत्व के माध्यम से ही संभव है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और वांगचुक के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
