चंडीगढ़ के प्रशासक ने एक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पौधारोपण के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में 2 करोड़ पौधे लगाए गए होते, तो एक इंच जमीन भी खाली नहीं बचती। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे झूठ और गप्पें मारना बंद करें और जमीनी स्तर पर वास्तविक कार्यों पर ध्यान दें।
प्रशासक ने कहा कि कई स्थानों पर पहाड़ और वन क्षेत्र अब भी खाली या बंजर दिखाई देते हैं, जबकि रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर पौधारोपण का दावा किया गया है। उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों से वास्तविक आंकड़े और कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कुछ अधिकारी सम्मान और पुरस्कार तो लेकर आ जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते। प्रशासक ने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल कागजी उपलब्धियों के बजाय वास्तविक कार्यों और उनके प्रभाव को प्राथमिकता देगा।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भविष्य में किसी भी योजना या अभियान की प्रगति रिपोर्ट पूरी पारदर्शिता और तथ्यात्मक आधार पर प्रस्तुत की जाए। साथ ही पौधारोपण अभियानों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा और सत्यापन कराने पर भी जोर दिया गया।
प्रशासन ने संकेत दिया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
