हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में अवैध ब्लीच हाउसों को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में जिले में 132 अवैध ब्लीच हाउसों को सील किया गया। हालांकि इनमें से केवल तीन इकाइयों पर ही जुर्माना लगाया गया, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई और पर्यावरणीय नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
RTI से मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न विभागों द्वारा समय-समय पर अवैध रूप से संचालित ब्लीच हाउसों के खिलाफ अभियान चलाए गए। इन इकाइयों पर पर्यावरण मानकों के उल्लंघन, प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी और आवश्यक स्वीकृतियों के बिना संचालन करने के आरोप थे।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल सीलिंग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उनका तर्क है कि यदि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तो अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना मुश्किल हो जाता है।
मामले में यह भी चर्चा है कि पर्यावरण संबंधी मामलों में दिए गए निर्देशों और आदेशों के प्रभावी पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक प्रदूषण का असर आसपास के क्षेत्रों की हवा, पानी और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, इसलिए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाना जरूरी है।
RTI के खुलासे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध इकाइयों के खिलाफ पारदर्शी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। संबंधित विभागों की ओर से इस खुलासे पर प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
