हरियाणा में पैर की हड्डी के इलाज के बजाय दिल का ऑपरेशन किए जाने के चर्चित मामले में अस्पताल प्रबंधन ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। अस्पताल ने स्वीकार किया कि दस्तावेजों में गलती हुई थी, लेकिन साथ ही कई आरोपों पर अपना पक्ष भी रखा है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज के सहमति (कंसेंट) फॉर्म में जिस कॉलम में हस्ताक्षर किए गए थे, उसमें परिजनों के नाम उन्होंने स्वयं लिखे थे। अस्पताल का दावा है कि इस आधार पर पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
अस्पताल ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR नियमों के अनुरूप नहीं है। प्रबंधन के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी दस्तावेजों तथा मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब आरोप लगा कि पैर की हड्डी के इलाज के लिए भर्ती मरीज का दिल का ऑपरेशन कर दिया गया। इस घटना के बाद मरीज की मौत हो गई थी और परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही, गलत इलाज और आयुष्मान योजना के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए थे।
मामले में पुलिस जांच जारी है। संबंधित विभाग भी मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। अस्पताल और परिजनों के दावों के बीच अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
