हरियाणा के रेवाड़ी में बारिश के बाद जलभराव की समस्या को लेकर नगर परिषद की चेयरपर्सन और पार्षदों के बीच विवाद सामने आया है। शहर के कई इलाकों में सड़कें पानी से लबालब हो गईं, जिसके चलते लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
जलभराव को लेकर पार्षदों ने नालों की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद बारिश होते ही शहर की कई सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।
वहीं, चेयरपर्सन की ओर से भी जलभराव को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। नगर परिषद का कहना है कि बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी जमा होने के बावजूद उसे निकालने के लिए टीमें काम कर रही हैं। जल निकासी के लिए पंप और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शहर के लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। कई निचले इलाकों में पानी जमा होने से दुकानदारों, वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है।
पार्षदों और चेयरपर्सन के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सवाल यह है कि नालों की सफाई पर खर्च किए गए लाखों रुपये के बावजूद जलभराव की समस्या क्यों बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग की है।
फिलहाल नगर परिषद स्तर पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान जारी है। आने वाले दिनों में नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
