लिपुलेख मार्ग पर बढ़ा विवाद, नेपाल ने भारतीय यात्रियों को दी चेतावनी
नेपाल और भारत के बीच एक बार फिर सीमा विवाद को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। इस बार विवाद का केंद्र लिपुलेख दर्रा बना हुआ है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है।
नेपाल सरकार ने हाल ही में बयान जारी कर कहा है कि लिपुलेख क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है, और भारतीय यात्रियों को इस मार्ग से मानसरोवर यात्रा नहीं करनी चाहिए। नेपाल के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
वहीं, भारत ने नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि लिपुलेख दर्रा ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा रहा है और नेपाल के दावे का कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मार्ग लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल होता रहा है।
लिपुलेख दर्रा सामरिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख रास्ता है। ऐसे में इस क्षेत्र को लेकर विवाद का सीधा असर यात्रियों और दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाना जरूरी है, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव न बढ़े।
फिलहाल, दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है और इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
