ईरान युद्ध का असर, यूरोप में केवल 6 हफ्ते का जेट फ्यूल बचा
लुफ्थांसा ने बड़े पैमाने पर उड़ानों को रद्द करने का फैसला लिया है। कंपनी ने करीब 20 हजार फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं, जिसका मुख्य कारण बढ़ती ईंधन कीमतें और सप्लाई में कमी बताई जा रही है। इस फैसले का असर लाखों यात्रियों पर पड़ा है, जिन्हें अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ रही हैं।
बताया जा रहा है कि ईरान से जुड़े हालिया तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ा है, जहां जेट फ्यूल की लागत अचानक बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप में जेट फ्यूल का स्टॉक केवल 6 हफ्तों के लिए ही बचा है, जिससे आने वाले समय में और भी उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। एयरलाइंस कंपनियां अब लागत कम करने और सीमित संसाधनों के साथ संचालन जारी रखने के विकल्प तलाश रही हैं।
लुफ्थांसा ने कहा है कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्हें वैकल्पिक फ्लाइट्स या रिफंड की सुविधा दी जा रही है। हालांकि, अचानक इतने बड़े पैमाने पर रद्दीकरण से यात्रियों को काफी असुविधा हो रही है।
एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो वैश्विक हवाई सेवाओं पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है। इससे टिकट की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण उत्पन्न चुनौतियों को उजागर करती है, जिसका असर आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक पर पड़ रहा है।
