हरियाणा में आयोजित खाप प्रतिनिधियों की बैठक में सामाजिक परंपराओं और सार्वजनिक छवि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सर्वखाप प्रधान ने कहा कि खाप पंचायतों के कार्यक्रमों और बैठकों में हुक्का संस्कृति को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय किए गए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
सर्वखाप प्रधान का कहना था कि बदलते समय के साथ समाज को भी सकारात्मक बदलाव अपनाने होंगे। उनका उद्देश्य युवाओं के बीच बेहतर संदेश देना और सामाजिक आयोजनों को अनुशासित एवं जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने सभी खाप प्रतिनिधियों से नए नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की अपील की।
बैठक के दौरान हरियाणवी कलाकार अजय हुड्डा भी चर्चा में रहे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं भी दूध का धुला नहीं हूं।” उनके इस बयान को आत्ममंथन और समाज में सुधार की आवश्यकता से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज किसी सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ता है तो सभी को उसका समर्थन करना चाहिए।
बैठक में मौजूद विभिन्न खाप प्रतिनिधियों ने भी सामाजिक मूल्यों, युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप परंपराओं में सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज के हित में लिए गए निर्णयों का सभी को सम्मान करना चाहिए।
फिलहाल बैठक में हुई चर्चाओं और प्रस्तावों को लेकर प्रदेशभर में चर्चा जारी है। आगे इन निर्णयों को किस तरह लागू किया जाएगा, इस पर संबंधित खाप पंचायतें अपने स्तर पर निर्णय लेंगी।
