हरियाणा सरकार ने राज्य में जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य फर्जी रजिस्ट्री, दस्तावेजों में हेरफेर और भूमि विवादों पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके तहत राजस्व विभाग के करीब 40.20 करोड़ पुराने रिकॉर्ड को डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था लागू होने से जमीन संबंधी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा। नागरिकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन संरक्षित रहेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि डिजिटाइजेशन के बाद पुराने दस्तावेजों का सुरक्षित डिजिटल संग्रह तैयार होगा, जिससे रिकॉर्ड के खोने, खराब होने या छेड़छाड़ की आशंका कम होगी। साथ ही, जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों में भी अधिक पारदर्शिता आएगी।
राजस्व विभाग इस परियोजना के तहत पुराने दस्तावेजों की स्कैनिंग, सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम चरणबद्ध तरीके से करेगा। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि यह पहल भूमि प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे आम नागरिकों, किसानों, खरीदारों और सरकारी विभागों को जमीन संबंधी रिकॉर्ड तक तेज और सुविधाजनक पहुंच मिलेगी। परियोजना पूरी होने के बाद हरियाणा में भूमि अभिलेखों का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।
