जमशेदपुर में कारोबारी परिवार से जुड़े कैरव गांधी के अपहरण का मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि इस वारदात की साजिश दिसंबर महीने से ही रची जा रही थी और पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग इंडोनेशिया से की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, अपहरण की योजना बेहद पेशेवर तरीके से बनाई गई थी। आरोपियों ने कैरव गांधी की दिनचर्या, आने-जाने के रास्तों, सुरक्षा व्यवस्था और मोबाइल गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जो लगातार जानकारी मास्टरमाइंड तक पहुंचा रहे थे।
जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना इंडोनेशिया में बैठकर पूरी साजिश को निर्देश दे रहा था। वह इंटरनेट कॉलिंग ऐप्स और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आरोपियों से संपर्क में था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। अपहरण के बाद फिरौती की रकम कैसे मांगी जाएगी और पैसे की डिलीवरी किस तरह होगी, इसका पूरा खाका पहले से तैयार था।
अपहरण के दिन आरोपियों ने सुनसान इलाके को चुना और पहले से तय योजना के तहत कैरव गांधी को निशाना बनाया। वारदात के बाद युवक को अलग-अलग ठिकानों पर रखा गया, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। हालांकि, तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और मामले की परतें खोलनी शुरू कर दीं।
पुलिस ने इस केस में कई आरोपियों को हिरासत में लिया है और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को लेकर केंद्रीय एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है। इंडोनेशिया में बैठे मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच की जा रही है और उसे भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
फिलहाल कैरव गांधी सुरक्षित हैं और पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय साजिश का उदाहरण है, जिसमें आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
