कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली डॉ. सीमा ने अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा था जब डिलीवरी के बाद वह अपने बेटे को गोद में भी नहीं उठा पाती थीं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी की।
डॉ. सीमा ने बताया कि मां बनने के बाद दोबारा मैदान में लौटना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि वापसी के दौरान उनका पहला थ्रो 15 मीटर तक भी नहीं पहुंचा, जिससे उन्हें अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को लेकर काफी मेहनत करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि इस मुश्किल दौर में उनके पति ने सबसे बड़ा साथ दिया। परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ उन्होंने सीमा को लगातार अभ्यास के लिए प्रेरित किया और कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में हर संभव सहयोग दिया।
लगातार मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर डॉ. सीमा ने अपनी फिटनेस दोबारा हासिल की और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया।
डॉ. सीमा की कहानी उन खिलाड़ियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती हैं। उनका मानना है कि संकल्प, मेहनत और परिवार का साथ हो तो किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है।
