दवा घोटाले से जुड़े एक चर्चित मामले में हरियाणा कैडर के एक IPS अधिकारी का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। मामले की जांच कर रही Central Bureau of Investigation इस पूरे प्रकरण की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही है। आरोप है कि जांच से राहत दिलाने का आश्वासन देकर एक पुलिस इंस्पेक्टर के माध्यम से करोड़ों रुपये की कथित डील की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं जिनमें करीब 3 करोड़ रुपये के लेनदेन की चर्चा सामने आई है। आरोप है कि संबंधित पक्षों को जांच में राहत दिलाने अथवा कार्रवाई को प्रभावित करने का भरोसा दिया गया था। इसी कथित सौदेबाजी में एक इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।
CBI अब वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित डील वास्तव में हुई थी या नहीं, और यदि हुई तो उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर मामले को आगे बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित एजेंसियां सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी ही साझा कर रही हैं। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता जब तक अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं।
इस प्रकरण ने प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल CBI की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
