दिल्ली कूच की घोषणा के बावजूद इस बार पंजाब के किसान स्थायी (पक्का) मोर्चा नहीं लगा सके। इसके पीछे कई प्रशासनिक और रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने पिछली बार हुई कुछ प्रमुख चूकों को दोहराने से परहेज किया, जिससे हालात पहले की तुलना में अलग रहे।
बताया जा रहा है कि सरकार ने पहले से ही बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक प्रबंधन और पुलिस बल की तैनाती कर दी थी। साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा गया, जिससे बड़े स्तर पर धरना या स्थायी मोर्चा बनने की स्थिति नहीं बन पाई।
दूसरी ओर, किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई बातचीत में दो प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की जानकारी भी सामने आई। इससे आंदोलन को लेकर तत्काल टकराव की स्थिति कम हुई। कई किसान नेताओं ने आगे भी बातचीत जारी रखने की बात कही।
जानकारों के अनुसार, इस बार किसान संगठनों के एक वर्ग ने भी तत्काल पक्का मोर्चा लगाने के बजाय वार्ता के रास्ते को प्राथमिकता दी। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों के कारण बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का एक स्थान पर लंबे समय तक जुटना भी आसान नहीं रहा।
हालांकि, किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी अन्य लंबित मांगों पर यदि संतोषजनक समाधान नहीं निकला तो भविष्य में आंदोलन की रणनीति दोबारा तय की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास जारी रहेगा।
