हरियाणा में सरकारी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक गर्भवती महिला के पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी को करीब 7 घंटे तक ब्लीडिंग होती रही, लेकिन अस्पताल का स्टाफ समय पर मदद के लिए नहीं पहुंचा। पति का आरोप है कि जब वह स्टाफ को बुलाने गया तो उसके साथ मारपीट की गई।
पति के अनुसार, उसकी पत्नी गर्भवती थी और अस्पताल में भर्ती थी। इसी दौरान उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई। परिवार का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन समय पर उचित मदद नहीं मिली।
पति का आरोप है कि करीब 7 घंटे तक उसकी पत्नी ब्लीडिंग से परेशान रही। इस दौरान वह लगातार अस्पताल के स्टाफ से मदद की गुहार लगाता रहा। उसका दावा है कि कुछ कर्मचारी फोन चलाने में व्यस्त थे और उसकी पत्नी की गंभीर स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
पति ने आरोप लगाया कि जब उसने कर्मचारियों से पत्नी को देखने और इलाज शुरू करने की गुहार लगाई तो उसे ही पीट दिया गया। उसके अनुसार, अस्पताल में मौजूद स्टाफ के रवैये से परिवार बेहद परेशान हो गया।
मामले में पति ने यह भी दावा किया कि उससे कथित तौर पर कहा गया, ‘बच्चा मरे या जच्चा हमें क्या।’ हालांकि, यह कथन पति द्वारा लगाए गए आरोप का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग को गंभीर स्थिति माना जा सकता है और ऐसी परिस्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी होता है। महिला की वास्तविक मेडिकल स्थिति और उसे किस तरह का उपचार मिला, इसकी जानकारी मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल की जांच से स्पष्ट होगी।
परिवार ने अस्पताल की व्यवस्था और स्टाफ के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर उपचार और ध्यान दिया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों से शिकायत और जांच की मांग की जा सकती है। जांच में अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों, CCTV फुटेज और परिवार के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि मारपीट की शिकायत भी दर्ज कराई जाती है तो पुलिस इस पहलू की अलग से जांच कर सकती है। अस्पताल परिसर में मौजूद CCTV फुटेज से घटना के समय की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
परिजनों की ओर से जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही अस्पताल में मरीजों के साथ व्यवहार और आपात स्थिति में स्टाफ की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला की स्थिति क्या थी, उसे कितनी देर तक उपचार मिला और घटना के समय ड्यूटी पर कौन-कौन कर्मचारी मौजूद थे।
फिलहाल गर्भवती महिला की ब्लीडिंग और पति से कथित मारपीट के आरोपों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
