बेटों ने छोड़ा, बहुओं ने ठुकराया; फिर भी मां बोलीं- बच्चे बिजी हैं
मदर्स डे के मौके पर कई ऐसी मांओं की कहानियां सामने आती हैं, जिनकी जिंदगी अब वृद्धाश्रम की चारदीवारी में सिमट गई है। किसी को बेटों ने छोड़ दिया, तो किसी को बहुओं ने अपनाने से इनकार कर दिया। बावजूद इसके, मांओं के दिल में बच्चों के लिए प्यार आज भी वैसा ही है।
वृद्धाश्रम में रहने वाली कई बुजुर्ग महिलाएं सालों से अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रही हैं। कुछ मांओं की आंखें हर त्योहार और हर फोन कॉल पर दरवाजे की ओर टिक जाती हैं।
भावुक कर देने वाली बात यह है कि जब उनसे बच्चों के बारे में पूछा जाता है, तो ज्यादातर मांएं यही कहती हैं— “बच्चे बहुत बिजी हैं, इसलिए नहीं आ पाते।”
कई महिलाएं बताती हैं कि उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी और बेहतर भविष्य के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है।
वृद्धाश्रम संचालकों का कहना है कि त्योहारों और खास दिनों पर बुजुर्गों की भावनाएं और ज्यादा उभरकर सामने आती हैं। कई लोग अपने परिवार की याद में भावुक हो जाते हैं।
यह कहानी सिर्फ कुछ मांओं की नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी है— क्या आधुनिक जीवन की व्यस्तता रिश्तों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है?
मदर्स डे हमें सिर्फ शुभकामनाएं देने का नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के साथ समय बिताने और उनका सम्मान करने का भी संदेश देता है।
