रोहतक में संत रामपाल के खिलाफ ग्रामीणों और हुड्डा खाप की ओर से विरोध सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि धार्मिक पुस्तकों के जरिए लोगों के बीच भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज में पाखंडवाद और ढोंग के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने इस मुद्दे को लेकर बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि समाज में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर लोगों को भ्रमित करने वाली बातों का विरोध किया जाना चाहिए।
हुड्डा खाप के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे पाखंडवाद और अंधविश्वास के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से समाज में गलत जानकारी फैलाए जाने पर उसका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा।
ग्रामीणों ने संत रामपाल से जुड़ी कुछ किताबों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन पुस्तकों में ऐसी बातें लिखी गई हैं, जिनसे लोगों के बीच भ्रांतियां पैदा हो रही हैं। हालांकि, किताबों में किए गए दावों और ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग तथ्यों की जांच के बाद ही की जा सकती है।
विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर लोगों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से किसी भी धार्मिक या सामाजिक दावे को बिना जांचे स्वीकार नहीं करने की अपील की।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध किसी धर्म या धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि कथित पाखंड और गलत जानकारी के खिलाफ है। उन्होंने सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
बैठक में ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस तरह के मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाने की बात कही। हुड्डा खाप के प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज में भाईचारा बनाए रखते हुए गलत प्रथाओं और अंधविश्वास का विरोध किया जाएगा।
इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से भी अपील की कि समाज में विवाद पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जाए। साथ ही धार्मिक मामलों को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने की बात कही गई।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों के विरोध के बाद अब यह मुद्दा सामाजिक और धार्मिक बहस का विषय बन गया है।
फिलहाल रोहतक में संत रामपाल के खिलाफ ग्रामीणों और हुड्डा खाप की ओर से विरोध जताया गया है। ग्रामीणों ने पाखंडवाद का विरोध जारी रखने की बात कही है और धार्मिक पुस्तकों के जरिए भ्रांतियां फैलाने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्षों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
