हरियाणा में चर्चित रहे सतलोक आश्रम और उसके प्रमुख Rampal से जुड़े मामलों को लेकर एक नया दावा सामने आया है। सतलोक आश्रम की वेबसाइट पर प्रकाशित एक विस्तृत बयान में कहा गया है कि रामपाल को पुलिस ने झूठे मामलों में फंसाया था। साथ ही करौंथा और बरवाला से जुड़े घटनाक्रम पर भी आश्रम की ओर से पहली बार विस्तार से अपना पक्ष रखा गया है।
वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री के अनुसार, आश्रम का दावा है कि करौंथा और बरवाला की घटनाओं के दौरान उसके खिलाफ की गई कार्रवाई तथ्यों पर आधारित नहीं थी। बयान में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि रामपाल तथा आश्रम के अनुयायियों के साथ अन्याय हुआ।
आश्रम की ओर से यह भी कहा गया है कि इन घटनाओं को लेकर अब तक केवल एक पक्ष ही सामने आता रहा, जबकि उनकी बात सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ सकी। इसी कारण वेबसाइट पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है, ताकि लोग आश्रम का पक्ष भी पढ़ सकें।
हालांकि, वेबसाइट पर किए गए इन दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या अदालत द्वारा इस संदर्भ में पुष्टि नहीं की गई है। करौंथा और बरवाला से जुड़े मामलों में न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाएं अपने-अपने स्तर पर चल चुकी हैं तथा विभिन्न मामलों में अदालतों के निर्णय भी सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पक्ष द्वारा जारी बयान या वेबसाइट पर प्रकाशित दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में अदालत के रिकॉर्ड, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक दस्तावेजों को ही प्रामाणिक आधार माना जाता है।
फिलहाल सतलोक आश्रम की वेबसाइट पर प्रकाशित इस बयान को लेकर चर्चा जारी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से इस पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
