थरूर के लेख के जिक्र पर CJI बोले—यह व्यक्तिगत राय, अदालत तथ्यों पर चलेगी
Sabarimala से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणियां सामने आईं। सुनवाई के दौरान जस्टिस B.V. Nagarathna ने स्पष्ट कहा कि अदालत को “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” से मिली जानकारी की आवश्यकता नहीं है और फैसले केवल ठोस तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर ही किए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान जब Shashi Tharoor के एक लेख का जिक्र किया गया, तब भारत के मुख्य न्यायाधीश Dhananjaya Y. Chandrachud ने कहा कि कोई भी लेख लेखक की व्यक्तिगत राय होती है और उसे अदालत के निर्णय का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने साफ किया कि न्यायिक प्रक्रिया में केवल प्रमाणिक दस्तावेज, कानूनी तर्क और संवैधानिक प्रावधान ही मान्य होंगे। सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों पर आधारित जानकारी को अदालत में महत्व नहीं दिया जाएगा।
सबरीमाला से जुड़ा यह मामला लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है और इससे जुड़े विभिन्न पक्षों की दलीलें अदालत में रखी जा रही हैं। इस दौरान न्यायालय ने बार-बार यह दोहराया है कि वह केवल कानून और संविधान के आधार पर ही निर्णय लेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, इस सुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अदालत किसी भी तरह की अप्रमाणिक या सोशल मीडिया आधारित जानकारी पर भरोसा नहीं करती और न्यायिक निर्णय पूरी तरह तथ्य आधारित होते हैं।
