हरियाणा में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार करीब एक सप्ताह बाद मानसून फिर से सक्रिय होने की संभावना है। लंबे अंतराल के कारण राज्य के कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सिरसा में सामान्य से 77 प्रतिशत कम और हिसार में 55 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है। बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी घट रही है, जिससे धान, बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती, तो किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है। जिन क्षेत्रों में नहर या ट्यूबवेल की सुविधा सीमित है, वहां किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले सप्ताह मानसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना जताई है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी सिस्टम के फिर से मजबूत होने के बाद राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग की ताजा अपडेट पर नजर रखें और उसी के अनुसार खेती से जुड़े निर्णय लें।
प्रशासन ने भी किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी आपात स्थिति में कृषि एवं स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। यदि मानसून समय पर सक्रिय होता है, तो फसलों को बड़ा नुकसान होने की आशंका कम हो सकती है।
