मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े संकट का असर अब हरियाणा के बासमती चावल निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। जानकारी के अनुसार, करीब 1 लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है, जिससे निर्यात की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
निर्यातकों के मुताबिक, जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और शिपिंग शेड्यूल में देरी के कारण तैयार माल समय पर विदेश नहीं भेजा जा पा रहा। इससे निर्यातकों को लगभग ₹1000 करोड़ तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा देश के प्रमुख बासमती उत्पादक और निर्यातक राज्यों में शामिल है। प्रदेश से बड़ी मात्रा में बासमती चावल ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में भेजा जाता है। हॉर्मूज मार्ग प्रभावित होने से इन देशों तक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
निर्यातकों का कहना है कि बंदरगाहों पर कंटेनर रुके होने से भंडारण लागत, शिपिंग चार्ज और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर किसानों, राइस मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े हजारों लोगों पर भी पड़ सकता है।
व्यापार संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वैकल्पिक शिपिंग व्यवस्था, बीमा सहायता और निर्यातकों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकला तो बासमती कारोबार को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।
