₹560 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड मामले में एक IAS अधिकारी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और CBI ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे।
बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी IAS अधिकारी के खिलाफ न तो रिश्वत लेने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है और न ही किसी प्रकार का मनी ट्रेल मिला है। वकीलों ने अदालत से इन आधारों पर जमानत देने की मांग की।
वहीं, CBI ने अदालत में तर्क दिया कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका की जांच अभी भी महत्वपूर्ण है। एजेंसी ने जमानत दिए जाने का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने CBI के तर्कों को अधिक मजबूत मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। आरोपी पर लगे आरोपों का अंतिम निर्णय ट्रायल और अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही होगा। अदालत में आरोप सिद्ध होने तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जाता।
