हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में जांच तेज हो गई है। मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी RK Singh और पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट Prince को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। CBI के अनुसार, मामले से जुड़े कुछ डिजिटल रिकॉर्ड और संचार माध्यमों की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित मास्टरमाइंड के साथ हुई कुछ चैट्स को डिलीट किया गया था। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये चैट्स कब, कैसे और किन परिस्थितियों में हटाई गईं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
मामला 661 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग लेन-देन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही और किस स्तर पर प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई।
अदालत में पेशी के दौरान CBI ने जांच की प्रगति और जुटाए गए साक्ष्यों की जानकारी दी। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
फिलहाल CBI की जांच जारी है और एजेंसी इस मामले से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों, वित्तीय लेन-देन तथा डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
