हरियाणा के पानीपत में XEN सुनीता के 12 वर्षीय बेटे कबीर के अपहरण मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड आदेश नामक युवक है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। आदेश पर करीब 25 लाख रुपये का कर्ज था और वह आर्थिक संकट से जूझ रहा था।
जांच में सामने आया कि आदेश की मुलाकात कोचिंग सेंटर में शारदा से हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया। पुलिस का दावा है कि गर्लफ्रेंड के महंगे शौक, घूमने-फिरने और लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाने के चक्कर में आदेश ने काफी कर्ज ले लिया था। जब कर्ज बढ़कर 25 लाख रुपये तक पहुंच गया तो उसने गलत रास्ता चुन लिया।
आरोपी का दोस्त विशाल थर्मल पावर स्टेशन कॉलोनी में रहता था। उसके पिता वहां कर्मचारी हैं, इसलिए उसे अधिकारियों और उनके परिवारों की जानकारी थी। इसी दौरान XEN सुनीता के बेटे कबीर को निशाना बनाने की योजना बनाई गई।
12 जून की शाम को एक परिचित छात्र के जरिए कबीर को घर से बाहर बुलाया गया। उसे शहर घुमाने का झांसा देकर कार में बैठाया गया और फिर अपहरण कर लिया गया। आरोपियों ने बच्चे को पानीपत, रोहतक और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में घुमाया। इसी दौरान कबीर के मोबाइल से उसकी मां को व्हाट्सएप कॉल कर 1.5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस कार्रवाई की आशंका में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से अवैध हथियार भी जुटा लिए थे। उनका इरादा घिरने पर पुलिस पर फायरिंग कर भागने का था।
हालांकि तीन बड़ी गलतियों ने उनकी पूरी योजना को विफल कर दिया। पहली गलती यह रही कि उन्होंने फिरौती मांगने के लिए कबीर के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया, जिससे पुलिस को तकनीकी सुराग मिल गया। दूसरी गलती किराए की कार का उपयोग करना था, जिसमें GPS सिस्टम लगा हुआ था। इससे पुलिस को उनकी लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिली। तीसरी और सबसे बड़ी गलती यह थी कि अपहरण के बाद बच्चे को छिपाने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना तय नहीं किया गया। आरोपी लगातार अलग-अलग जगह घूमते रहे।
मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और GPS ट्रैकिंग की मदद से पुलिस ने करीब 11 घंटे के भीतर आरोपियों को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपियों ने बच्चे को चलती कार से नीचे फेंक दिया। बाद में मुठभेड़ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपियों से और गहन पूछताछ की जाएगी।
