हरियाणा के पंचकूला में चल रहे HPSC (हरियाणा लोक सेवा आयोग) अभ्यर्थियों के धरने में पूर्व मुख्यमंत्री की एंट्री से आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन मिला है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने धरनारत युवाओं से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से सकारात्मक कदम उठाने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भर्ती प्रक्रिया में लागू 35 प्रतिशत क्राइटेरिया पर सवाल उठाते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। उनका कहना था कि यह व्यवस्था कई योग्य उम्मीदवारों के लिए बाधा बन रही है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों में संशोधन की मांग दोहराई।
इस बीच, धरने और अनशन में शामिल कुछ युवाओं की तबीयत बिगड़ने की सूचना भी सामने आई है। स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों की जांच की। कुछ अनशनकारियों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से भी धरनारत अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया।
फिलहाल प्रदर्शन जारी है और अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब सभी की निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर टिकी हैं
