अमेरिका की प्रसिद्ध लेखिका पामेला ने बचपन और घर से जुड़े भावनात्मक रिश्तों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न बस जाए, बचपन का घर उसे हमेशा अपनी ओर खींच ही लेता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति अपने पुराने घर की दहलीज पर कदम रखता है, यादों का सैलाब अपने आप उमड़ने लगता है।
पामेला के मुताबिक बचपन का घर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं होता, बल्कि वह भावनाओं, रिश्तों और अनुभवों का जीवंत संग्रह होता है। वहीं पहली हंसी, पहला डर, पहली दोस्ती और परिवार के साथ बिताए अनगिनत पल इंसान के मन में हमेशा के लिए बस जाते हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ शहर बदल जाते हैं, लोग बदल जाते हैं, लेकिन बचपन की यादें वैसी ही ताजा रहती हैं।
लेखिका ने यह भी कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तकनीक से भरी दुनिया में लोग अक्सर अपने अतीत से कटते जा रहे हैं, लेकिन बचपन का घर एक ऐसा धागा है जो इंसान को उसकी जड़ों से जोड़े रखता है। जब भी व्यक्ति थक जाता है या जीवन के किसी मोड़ पर ठहरकर सोचता है, तो बचपन की वही गलियां, आंगन और कमरे उसे मानसिक सुकून देते हैं।
पामेला का मानना है कि बचपन का घर इंसान की पहचान का हिस्सा होता है। वह हमें यह याद दिलाता है कि हम कहां से आए हैं और किन मूल्यों के साथ बड़े हुए हैं। यही वजह है कि वर्षों बाद भी उस घर की देहलीज पर पहुंचते ही दिल भर आता है और बीता हुआ समय आंखों के सामने चलचित्र की तरह घूमने लगता है।
