महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोलापुर और संभाजीनगर जिलों से नाबालिगों द्वारा वोट डालने के आरोप सामने आए हैं, जिससे चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सोलापुर में आरोप है कि एक जिला परिषद उम्मीदवार का नाबालिग बेटा मतदान केंद्र पर पहुंचा और उसने वोट डाल दिया। बताया जा रहा है कि उसकी उम्र 18 साल से कम है, इसके बावजूद पहचान पत्रों की ठीक से जांच किए बिना मतदान की अनुमति दे दी गई। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है और विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं संभाजीनगर में भी इसी तरह का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक विधायक अपने नाबालिग बेटे को लेकर मतदान केंद्र पर पहुंचा और उसे वोट दिलाने की कोशिश की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। विपक्ष का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में चुनाव नियमों की अनदेखी की गई।
इन आरोपों के बाद राज्य निर्वाचन विभाग ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि नाबालिगों द्वारा मतदान की पुष्टि होती है तो संबंधित मतदान कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नियमों के तहत वोट को अमान्य घोषित किया जा सकता है। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने को लेकर अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा मानी जा रही है।
