काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल घूमने गए एक भारतीय दंपती की यात्रा उस समय दर्दनाक हादसे में बदल गई जब होटल में ठहरने के दौरान पत्नी की अचानक मौत हो गई। शोकाकुल पति ने होटल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। साथ ही उन्होंने भारतीय एंबेसी पर भी समय पर मदद न करने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, दंपती नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक होटल में ठहरे हुए थे। देर रात पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पति का आरोप है कि उन्होंने तुरंत होटल स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन समय पर न तो डॉक्टर बुलाया गया और न ही एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था की गई।
पति का कहना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी पत्नी की जान बच सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कुछ होटल कर्मचारी मौके से गायब हो गए।
एंबेसी पर भी आरोप
पीड़ित पति ने दावा किया कि उन्होंने भारत की एंबेसी से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन कॉल का जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि विदेश में किसी भारतीय नागरिक के साथ ऐसी घटना होने पर दूतावास की जिम्मेदारी बनती है कि तुरंत सहायता प्रदान करे।
100 करोड़ मुआवजे की मांग
घटना से आहत पति ने होटल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक क्षतिपूर्ति का मामला नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
जांच की मांग
परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।
बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
यह मामला कई सवाल खड़े करता है—
- क्या होटल प्रबंधन ने समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई?
- क्या विदेश में भारतीय नागरिकों को पर्याप्त कांसुलर सहायता मिल रही है?
- आपात स्थिति में होटल और स्थानीय प्रशासन की क्या जिम्मेदारी होती है?
जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इन सवालों के जवाब मिलना मुश्किल है। लेकिन एक परिवार की खुशियां उजड़ चुकी हैं, और अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।
