चंडीगढ़। हरियाणा में सिविल सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। अब ट्रांसजेंडर समुदाय के अभ्यर्थी भी हरियाणा सिविल सर्विस (HCS) परीक्षा में आवेदन कर सकेंगे। Haryana Public Service Commission (HPSC) ने अपने ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में पहली बार ‘थर्ड जेंडर’ का अलग विकल्प जोड़ दिया है।
यह बदलाव उस कानूनी चुनौती के बाद किया गया, जो एक ट्रांसजेंडर पर्वतारोही द्वारा Punjab and Haryana High Court में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि आवेदन प्रक्रिया में ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प न होना संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला?
हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा के आवेदन फॉर्म में अब तक केवल ‘पुरुष’ और ‘महिला’ के विकल्प मौजूद थे। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के पास अपनी लैंगिक पहचान दर्ज करने का कोई विकल्प नहीं था।
एक ट्रांसजेंडर पर्वतारोही ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और HPSC से जवाब तलब किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने आवेदन फॉर्म में संशोधन करते हुए ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प जोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कदम
यह निर्णय पहले से ही ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को मान्यता देने वाले ऐतिहासिक फैसले की भावना के अनुरूप है, जिसमें Supreme Court of India ने ‘थर्ड जेंडर’ को कानूनी पहचान देने की बात कही थी। अदालत ने सरकारों को निर्देश दिया था कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों में ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ भेदभाव न किया जाए।
क्या बदलेगा अब?
- HCS परीक्षा में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी अपनी पहचान के साथ आवेदन कर सकेंगे।
- भविष्य में अन्य सरकारी भर्तियों में भी इसी तरह के बदलाव की संभावना बढ़ी।
- प्रशासनिक सेवाओं में विविधता और समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक दृष्टि से अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम है। इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा की नौकरियों में आगे आने का अवसर मिलेगा।
हरियाणा सरकार और HPSC के इस फैसले को प्रदेश में समावेशी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
