चंडीगढ़। पंजाब की म्यूजिक इंडस्ट्री में इन दिनों एक गाने को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। पंजाबी सिंगर रमन लखेसर के नए गाने की एक लाइन— “बादलां दा गढ़ लंबी थाना बल्लिए”—को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि यह लाइन दबाव के चलते डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई गई, जिसके बाद विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साध दिया।
क्या है पूरा मामला?
रमन लखेसर का यह गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। गाने की एक लाइन में “लंबी” और “बादल” का जिक्र था, जिसे राजनीतिक संदर्भ में देखा गया। “लंबी” पंजाब की चर्चित विधानसभा सीट रही है और “बादल” नाम राज्य की राजनीति से जुड़ा माना जाता है।
कुछ समय बाद गाने के आधिकारिक वर्जन से उक्त लाइन गायब पाई गई। इसके बाद विवाद और तेज हो गया।
शिअद का आरोप
शिरोमणि अकाली दल ने बयान जारी कर कहा कि AAP सरकार अभिव्यक्ति की आजादी से डर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक गाने की एक लाइन हटवाना इस बात का संकेत है कि सरकार आलोचना सहन नहीं कर पा रही। उन्होंने इसे कलाकारों की आवाज दबाने की कोशिश बताया।
AAP की प्रतिक्रिया
AAP से जुड़े नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि सरकार का गाने या किसी लाइन को हटाने से कोई लेना-देना नहीं है। यह फैसला कलाकार या प्रोडक्शन टीम का आंतरिक निर्णय हो सकता है।
सोशल मीडिया पर बहस
विवाद के बाद ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर बहस छिड़ गई।
- कुछ यूजर्स इसे “सेंसरशिप” बता रहे हैं।
- वहीं कुछ का कहना है कि कलाकारों को राजनीतिक संकेतों से बचना चाहिए।
कलाकार की चुप्पी
अब तक रमन लखेसर की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फैंस उनके स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं।
