मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा करते हुए कहा है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। ईरान के इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।
दुनिया के तेल व्यापार की ‘लाइफलाइन’ है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना निर्यात इसी मार्ग से करते हैं।
अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। इनमें से लगभग 50% आपूर्ति सीधे या परोक्ष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। ऐसे में अगर ईरान अपनी धमकी को अमल में लाता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है
- महंगाई दर पर दबाव बढ़ सकता है
- व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका
ईरान का रुख क्यों सख्त?
ईरान का कहना है कि उस पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के चलते वह यह कदम उठाने को मजबूर है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो वे क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों को रोक सकते हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम पर चिंता जताई है और समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखने की अपील की है।
वैश्विक बाजार में हलचल
ईरान की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तुरंत उछाल देखा गया। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है और शिपिंग कंपनियों ने भी सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
क्या हो सकता है आगे?
विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति कूटनीतिक बातचीत से सुलझ सकती है, लेकिन अगर सैन्य तनाव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, क्योंकि यहां की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय कर सकती है।
