अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। ईरान से जुड़े बढ़ते युद्ध और तनाव की स्थिति के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और प्रति बैरल कीमत 100 डॉलर के पार चली गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। ईरान क्षेत्र में किसी भी तरह के संघर्ष से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे तो कच्चे तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि भारत सरकार ने आम लोगों को राहत देने वाली बात कही है। सरकार के अनुसार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने की कोई योजना नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि देश में तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अगर जरूरत पड़ी तो टैक्स में कटौती या अन्य नीतिगत फैसले लेकर आम जनता पर महंगाई का बोझ कम किया जा सकता है।
उधर तेल बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की पूरी कोशिश की जाएगी, ताकि आम लोगों को महंगाई का अतिरिक्त झटका न लगे। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल की सप्लाई की स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
