19 मार्च 2026
एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि *बिहार के कई होटलों और रेस्टोरेंट में रसोई गैस की किल्लत के बीच शवदाह स्थल (श्मशान घाट) से निकाले गए कोयले का इस्तेमाल तंदूरी रोटी, चिकन और अन्य व्यंजन पकाने में किया जा रहा है।
क्या हुआ?
- भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने यह खुलासा किया कि पटना के बांस घाट, गुलबी घाट, खाजेकला, दानापुर, दीघा जैसे प्रमुख श्मशानों से निकाले गए कोयले को होटल और रेस्टोरेंट में आपूर्ति किया जा रहा है।
- रिपोर्टर ने खुद श्मशान घाट पर जाकर देखा कि चिता (शवदाह) की आग को जल्दी बुझाकर कोयला निकाला जा रहा है, जहां से एजेंट्स बोरी भरकर कोयला ले जा रहे हैं।
किसमें इस्तेमाल हो रहा है?
- सबसे ज्यादा तंदूरी रोटी और चिकन/रोस्ट में श्मशान का कोयला डाला जा रहा है।
- एजेंट्स का दावा है कि यह कोयला “अच्छा जलता है” और कोई हड्डी/अशुद्धता नहीं रहती, लेकिन इस पर कोई आधिकारिक टेस्ट नहीं हुआ है।
बाजार और डिमांड:
- गैस की कमी के कारण लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से यह अवैध कोयला सस्ता मिलता है (लगभग ₹6‑9 प्रति किलो), जबकि बाजार का सामान्य लकड़ी कोयला लगभग ₹25 प्रति किलो है।
- कई एजेंट्स के अनुसार कोयला 24 घंटे उपलब्ध है और बड़े व्यवसायिक उपयोग के लिए भी सप्लाई की जाती है।
सुरक्षा और स्वास्थ्य चिंता:
डॉक्टरों के मुताबिक श्मशान का कोयला असमर्थित स्रोतों से आता है और उसमें हानिकारक तत्व (जैसे आर्सेनिक, सीसा, पारा) होने की संभावना होती है। इससे अगर खाने में इस्तेमाल किया जाए तो *कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।
सरकारी या आधिकारिक बयान:
अब तक किसी स्वास्थ्य अथवा खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक जांच या रोकथाम के उपाय सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं।
