इच्छामृत्यु (Euthanasia) के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार भावुक माहौल में संपन्न हुआ। इस दौरान उनके पिता ने हाथ जोड़कर सभी से अपील की कि कोई भी रोए नहीं, बल्कि हरीश के फैसले का सम्मान करे। उनका कहना था कि हरीश ने जीवन के अंतिम समय में भी मानवता की मिसाल पेश की है।
हरीश राणा लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने इच्छामृत्यु का रास्ता चुना। परिवार और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी इच्छा का सम्मान किया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान माहौल गमगीन जरूर था, लेकिन उसमें गर्व और सम्मान भी साफ झलक रहा था। हरीश के पिता ने कहा, “मेरा बेटा आज भी जिंदा है, क्योंकि उसके अंगों से कई लोगों को नई जिंदगी मिली है।”
जानकारी के अनुसार, हरीश राणा के अंगदान से 6 जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिला है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके दिल, किडनी, लिवर और अन्य अंगों ने अलग-अलग लोगों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई।
इस घटना ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन सकता है। हरीश राणा का यह फैसला न सिर्फ साहसिक था, बल्कि मानवता के लिए एक प्रेरणा भी बन गया है।
