सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग रेप पीड़िता को थाने बुलाने के मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। यह मामला गुरुग्राम से जुड़ा है, जहां पुलिस ने संवेदनशील मामले में पीड़ित बच्ची को खुद थाने आने के लिए कहा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद “शॉकिंग” है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस पीड़िता के घर जाकर बयान क्यों नहीं दर्ज कर सकती? क्या पुलिस खुद को “राजा” समझती है?
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में पीड़ित की मानसिक स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। खासकर जब मामला एक नाबालिग बच्ची से जुड़ा हो, तो पुलिस को और अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत पुलिस पीड़ित के घर या सुरक्षित स्थान पर जाकर बयान दर्ज कर सकती है। इसके बावजूद बच्ची को थाने बुलाना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी गलत है।
गुरुग्राम पुलिस से इस मामले में जवाब तलब किया गया है और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए सख्त निर्देश देने की बात कही गई है।
अहम बात:
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि संवेदनशील अपराधों में पुलिस को कानून के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखना कितना जरूरी है।
