हाईकोर्ट की टिप्पणी- परिवहन नीति बनाना सरकार का अधिकार
मध्य प्रदेश में सड़कों पर चल रही पुरानी और जर्जर कमर्शियल बसों को हटाने का फैसला लिया गया है। राज्य में कुल 899 ऐसी बसों की पहचान की गई है, जिन्हें अब सड़कों से हटाया जाएगा। इस सूची में Jabalpur सबसे ऊपर है, जहां सबसे ज्यादा खटारा बसें चल रही थीं।
इस मामले में Madhya Pradesh High Court ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि परिवहन नीति बनाना राज्य सरकार का अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम जरूरी हैं।
सरकार का मानना है कि पुरानी बसें न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि प्रदूषण का स्तर भी बढ़ाती हैं। इन बसों के हटने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन बसों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इसके लिए बस मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम लंबे समय से जरूरी था, क्योंकि कई बसें तकनीकी रूप से फिट नहीं थीं, फिर भी सड़कों पर दौड़ रही थीं।
हालांकि, कुछ बस मालिकों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। लेकिन सरकार का कहना है कि सुरक्षा और नियमों का पालन सबसे महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, इस फैसले को सड़क सुरक्षा और बेहतर परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
