हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ और महिला आयोग की चेयरपर्सन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक कथित टिप्पणी को लेकर प्रदेशभर की नर्सें विरोध प्रदर्शन पर उतर आई हैं और कई सरकारी अस्पतालों में कार्य बहिष्कार किया गया। नर्सिंग कर्मचारियों ने महिला आयोग की चेयरपर्सन के इस्तीफे की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब महिला आयोग की चेयरपर्सन द्वारा कथित रूप से कहा गया, “क्या मैं आपकी बेटी किसी के साथ छोड़ दूं?” इस टिप्पणी को नर्सिंग स्टाफ ने अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया। नर्सों का आरोप है कि यह बयान उनके सम्मान और पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में नर्सिंग कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार और संबंधित अधिकारियों से मामले में कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि जब तक महिला आयोग की चेयरपर्सन अपने पद से इस्तीफा नहीं देतीं या सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अस्पतालों में कार्य बहिष्कार का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिला। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को जारी रखने की कोशिश की गई, लेकिन कई स्थानों पर सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
नर्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर विवाद का जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हैं। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और महिला आयोग इस विवाद पर आगे क्या कदम उठाते हैं।
