हरियाणा के रोहतक की एक निलंबित महिला शिक्षिका ने अपने निलंबन और हाल ही में हुए धरना प्रदर्शन को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। शिक्षिका का कहना है कि यदि वह धरने में शामिल नहीं होतीं तो उन्हें जीवनभर इसका अफसोस रहता। उन्होंने कहा कि एक मां होने के नाते उन्होंने अपने बेटे का साथ देने का निर्णय लिया।
शिक्षिका के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद उनका बेटा मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया था। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले का उसके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा और वह डिप्रेशन जैसी स्थिति से गुजरने लगा। ऐसे समय में परिवार का साथ देना जरूरी था, इसलिए उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि यदि वह धरने में नहीं जातीं तो समाज और परिवार के सामने उन्हें यह महसूस होता कि उन्होंने अपने बेटे के संघर्ष में उसका साथ नहीं दिया। शिक्षिका ने कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि एक मां के कर्तव्य के रूप में धरने में भाग लिया।
निलंबन की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह अपने पक्ष को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि उनकी मंशा किसी प्रकार की अनुशासनहीनता फैलाने की नहीं थी, बल्कि अपने बेटे और अन्य प्रभावित युवाओं की आवाज को समर्थन देना था।
यह मामला प्रदेश में भर्ती रद्द होने के बाद चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े विवादों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई और शिक्षिका के बयान पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी है। सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जा सकता है।
