हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के संभावित निजीकरण को लेकर विरोध तेज हो गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की जनसुनवाई में बिजली विभाग के कर्मचारियों, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर निजी कंपनी की संभावित एंट्री का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली सेवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने की मांग उठाई।
जनसुनवाई के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर सकता है। उनका दावा है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत विभाग पहले से राजस्व अर्जित कर रहा है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित क्षेत्र से करीब 777 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। ऐसे में निजीकरण की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए।
दूसरी ओर, निजी कंपनी की ओर से लाइसेंस प्रक्रिया नियामक आयोग के समक्ष विचाराधीन है। अंतिम निर्णय हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग द्वारा सभी पक्षों की दलीलें, कानूनी प्रावधान और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। फिलहाल किसी नई व्यवस्था को लागू करने संबंधी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।
कर्मचारी संगठनों और किसान प्रतिनिधियों ने मांग की कि बिजली वितरण व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी हितधारकों की राय को महत्व दिया जाए। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
फिलहाल मामला HERC के विचाराधीन है और आयोग के आगामी निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है। अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण व्यवस्था में कोई बदलाव होगा या नहीं।
