चंडीगढ़ PGI में नवजात बच्चे को बदलने के आरोप से हड़कंप मच गया है। एक पिता ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दस्तावेजों में बच्चे का लिंग ‘BOY’ दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में उसे लड़की सौंप दी गई। परिवार का दावा है कि तीन दिन बाद उस बच्ची की भी मौत हो गई।
परिवार के अनुसार, प्रसव के बाद उन्हें अस्पताल की ओर से बच्चे के बारे में जानकारी दी गई थी। पिता का कहना है कि अस्पताल से मिले कागजों में बच्चे के तौर पर ‘BOY’ लिखा हुआ था। बाद में जब नवजात को परिवार को सौंपा गया तो उन्होंने बच्ची होने का आरोप लगाया।
इस घटना के बाद परिवार के लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था और रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। पिता का आरोप है कि यदि रिकॉर्ड में बच्चे का लिंग लड़का दर्ज था तो बाद में उन्हें लड़की कैसे दी गई। परिवार पूरे मामले की जांच की मांग कर रहा है।
परिवार के अनुसार, नवजात बच्ची की हालत भी ठीक नहीं थी। उसे उपचार की जरूरत थी और करीब तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई और उन्होंने बच्चे की पहचान तथा अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन से भी जवाब मांगा जा सकता है। इस तरह के आरोपों की सच्चाई पता लगाने के लिए जन्म से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, डिलीवरी रिकॉर्ड, नवजात की पहचान से जुड़े दस्तावेज और अस्पताल की एंट्री की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अस्पताल में नवजात की पहचान को लेकर निर्धारित प्रक्रिया होती है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड, टैग, मेडिकल फाइल और अन्य दस्तावेजों का मिलान करके स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
परिवार का आरोप है कि कागजों में लड़का दर्ज होने के बावजूद उन्हें लड़की दी गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
बच्ची की तीन दिन बाद हुई मौत को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। यह पता लगाना जरूरी होगा कि नवजात की स्वास्थ्य स्थिति क्या थी, उसका उपचार किस तरह हुआ और मौत का चिकित्सकीय कारण क्या रहा।
मामले की जांच में अस्पताल के CCTV कैमरों की फुटेज भी अहम हो सकती है। डिलीवरी के समय से लेकर नवजात को परिवार को सौंपे जाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करने से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें अपने बच्चे के संबंध में पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है।
यदि जांच में रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच कोई गंभीर गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो अस्पताल की जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल चंडीगढ़ PGI में नवजात बच्चा बदलने के आरोप और तीन दिन बाद बच्ची की मौत का मामला चर्चा में है। परिवार जवाब और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। मामले की वास्तविक स्थिति अस्पताल के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के बाद ही साफ होगी।
