हरियाणा के झज्जर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली सरकार के एक मंत्री ने छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि “जंतर-मंतर युवाओं का मंच नहीं, बल्कि देश तोड़ने वालों का मंच है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन उनके अनुसार कुछ मंचों का इस्तेमाल ऐसे लोग भी करते हैं, जिनकी मंशा देशहित के खिलाफ होती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और उद्देश्य को समझें।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को इस तरह से खारिज करना उचित नहीं है।
वहीं, मंत्री के समर्थकों का कहना है कि उनका बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और जिम्मेदार विरोध के संदर्भ में था। दूसरी ओर, विरोधी पक्ष का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं को इस तरह के बयान से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। विभिन्न दलों और संगठनों की ओर से बयान पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
