पंचकूला में बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए नगर निगम अब आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए अपनी रणनीति बदलने की तैयारी कर रहा है। शहर में पिछले 6 महीने के दौरान करीब 7,600 डॉग बाइट के मामले सामने आने के बाद अब मल्टी-एजेंसी मॉडल के तहत काम करने की योजना बनाई जा रही है।
डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं ने शहर में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम सड़कों पर निकलने वाले लोगों को आवारा कुत्तों के झुंड से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम का मानना है कि केवल एक एजेंसी के भरोसे आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान करना मुश्किल है। इसी वजह से अलग-अलग विभागों और संबंधित एजेंसियों को साथ लेकर काम करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
मल्टी-एजेंसी मॉडल के तहत आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने, उनकी नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी जैसे कामों को बेहतर तरीके से लागू करने पर जोर दिया जा सकता है। साथ ही डॉग बाइट की शिकायतों वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम अब उन इलाकों पर भी फोकस कर सकता है जहां लगातार कुत्तों के हमले की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे स्थानों पर कुत्तों की संख्या, उनकी गतिविधियों और लोगों की शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।
7,600 डॉग बाइट केस का आंकड़ा सामने आने के बाद नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती है। लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए समस्या का स्थायी समाधान निकालना जरूरी होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्तों की समस्या को केवल उन्हें एक जगह से दूसरी जगह हटाकर हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण जैसे उपायों के साथ कचरा प्रबंधन और भोजन के खुले स्रोतों को नियंत्रित करना भी जरूरी है।
नगर निगम की नई रणनीति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर रहने की संभावना है। इसका उद्देश्य डॉग बाइट की घटनाओं को कम करना और शहर के लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है।
लोगों की उम्मीद है कि नई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे। लगातार शिकायत वाले क्षेत्रों में नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई से समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल पंचकूला नगर निगम बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए मल्टी-एजेंसी मॉडल पर काम करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में नई रणनीति के लागू होने के बाद ही पता चलेगा कि इससे शहर में कुत्तों के हमलों की घटनाओं में कितनी कमी आती है।
