हरियाणा के पानीपत में यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने सख्त कदम उठाए हैं। यमुना एक्शन प्लान के तहत उद्योगों और स्थानीय निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि केमिकल युक्त दूषित पानी को सीधे नालों या ड्रेनों में छोड़ने की बजाय टैंकरों के माध्यम से कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) तक पहुंचाया जाए।
बोर्ड ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा यमुना, ड्रेनों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा या औद्योगिक अपशिष्ट फेंकने वालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
HSPCB का कहना है कि मानसून के दौरान प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी उद्योग बिना उपचारित रासायनिक पानी को जल स्रोतों में न छोड़े। इसके लिए नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और निगरानी अभियान चलाए जाएंगे।
प्रशासन ने नगर निकायों और संबंधित विभागों को भी सफाई व्यवस्था मजबूत करने, ड्रेनों में ठोस कचरा जाने से रोकने और प्रदूषण फैलाने वालों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन उपायों से यमुना नदी की जल गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योग संचालकों से पर्यावरणीय मानकों का पालन करने और अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का सख्ती से अनुपालन करने की अपील की है। साथ ही आम नागरिकों से भी नदी और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने का आग्रह किया गया है।
