हेरिटेज फर्नीचर चोरी मामले में अब विधानसभा कमेटी ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कमेटी ने चंडीगढ़ प्रशासन से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस कदम को मामले की गहन पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जांच कमेटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के पास थी तथा कथित चोरी या गायब होने की घटनाओं के पीछे क्या कारण रहे। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक रिकॉर्ड, फाइलें और पुराने दस्तावेजों की मांग की गई है।
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2002 तक इन हेरिटेज वस्तुओं की देखरेख चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन थी। ऐसे में कमेटी उस अवधि से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा करना चाहती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संरक्षण और निगरानी की व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जा रही थी। जांच के दौरान विभिन्न विभागों की भूमिका और जिम्मेदारियों की भी पड़ताल की जाएगी।
विधानसभा कमेटी का मानना है कि हेरिटेज संपत्तियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की धरोहर होती हैं, इसलिए उनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर विषय है। इसी कारण मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है।
उधर, चंडीगढ़ प्रशासन को आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कमेटी संबंधित अधिकारियों और विभागों से भी स्पष्टीकरण मांग सकती है।
फिलहाल जांच की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। कमेटी रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई तय करेगी। मामले की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित अनियमितताओं या लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
