साबुन-बिस्किट के पैकेट छोटे, इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम 15% तक बढ़े
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, खाने के तेल की कीमतों में करीब 7% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।
केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कई चीजें भी प्रभावित हुई हैं। साबुन और बिस्किट जैसे उत्पादों के पैकेट छोटे कर दिए गए हैं, जिसे “श्रिंकफ्लेशन” कहा जाता है। कंपनियां कीमत बढ़ाने की बजाय मात्रा कम करके लागत संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।
इसके अलावा, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में भी 10 से 15% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल और परिवहन लागत में बढ़ोतरी है, जो वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि United States और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर उत्पादन, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन पर पड़ता है, जिससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई और बढ़ सकती है और आम लोगों की क्रय शक्ति पर असर पड़ेगा।
फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
