संत रामपाल ने प्रेमानंद महाराज को लेकर विवादित बयान दिया है। रामपाल ने प्रेमानंद महाराज की आध्यात्मिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें शास्त्रों का सही ज्ञान नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कृष्ण नाम के बजाय लोगों से ‘राधा-राधा’ का जाप कराया जा रहा है।
रामपाल ने अपने बयान में प्रेमानंद महाराज की साधना और धार्मिक शिक्षाओं पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि जिस तरीके से साधना कराई जा रही है, वह शास्त्रों के अनुसार नहीं है।
उन्होंने कहा कि केवल किसी नाम का जाप करने या विशेष तरीके की साधना करने से मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता। रामपाल ने अपने विचारों के आधार पर दावा किया कि सही साधना वही है, जो शास्त्रों में बताए गए तरीके के अनुसार की जाए।
बयान में रामपाल ने प्रेमानंद महाराज के ज्ञान को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि उनके पास आध्यात्मिक विषयों का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज की शिक्षाओं को अपने धार्मिक विचारों से अलग बताया।
रामपाल का यह बयान सामने आने के बाद धार्मिक और सोशल मीडिया जगत में चर्चा शुरू हो गई है। दोनों संतों के अनुयायियों के बीच उनके विचारों को लेकर बहस भी देखने को मिल सकती है।
रामपाल ने ‘राधा-राधा’ नाम के जाप को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि कृष्ण नाम को छोड़कर केवल राधा नाम का जाप करवाना शास्त्र सम्मत साधना नहीं है।
वहीं, प्रेमानंद महाराज की शिक्षाओं में भक्ति, नाम-स्मरण और आध्यात्मिक साधना को महत्वपूर्ण माना जाता है। रामपाल और प्रेमानंद महाराज की धार्मिक मान्यताओं और साधना की पद्धतियों में अंतर होने के कारण उनके अनुयायियों के बीच पहले भी अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं।
रामपाल द्वारा लगाए गए शास्त्र-विरोधी साधना और मोक्ष से जुड़े दावे उनके धार्मिक विचार हैं। इन दावों को किसी निष्पक्ष वैज्ञानिक तथ्य या सर्वमान्य धार्मिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
धार्मिक विषयों पर अलग-अलग संतों और परंपराओं की अलग-अलग मान्यताएं होती हैं। ऐसे में किसी भी बयान को समझने के लिए उसके पूरे संदर्भ और संबंधित संतों की शिक्षाओं को देखना जरूरी है।
रामपाल के इस बयान के बाद अब प्रेमानंद महाराज या उनके अनुयायियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।
फिलहाल रामपाल का प्रेमानंद महाराज को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज के ज्ञान और साधना पद्धति पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि शास्त्रों के खिलाफ साधना कराने से मोक्ष प्राप्त नहीं होगा।
