पंजाब के किसान संगठनों ने पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली कूच के कई बड़े आंदोलन किए हैं। इन आंदोलनों ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। हालांकि, तीनों अभियानों के परिणाम और परिस्थितियां अलग-अलग रहीं।
पहला दिल्ली कूच (2020–2021) सबसे बड़ा और प्रभावशाली आंदोलन माना जाता है। बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं तक पहुंचे और लंबे समय तक धरने पर बैठे रहे। आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। अंततः केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की, जिसे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि माना गया।
दूसरे चरण (2024) में किसान फिर अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़े, लेकिन शंभू बॉर्डर और अन्य सीमाओं पर भारी सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती के कारण उनका काफिला आगे नहीं बढ़ सका। आंदोलन लंबे समय तक मुख्य रूप से बॉर्डर क्षेत्रों तक सीमित रहा।
तीसरे प्रयास (2026) में भी किसानों ने दिल्ली कूच का आह्वान किया। हालांकि, इस बार सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच कुछ मांगों पर बातचीत और सहमति बनने के बाद कूच को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। साथ ही, हरियाणा-दिल्ली सीमाओं पर पहले से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां भी लागू रहीं।
इन तीनों अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि किसान आंदोलन की रणनीति और प्रशासनिक तैयारियां समय के साथ बदलती रही हैं। किसान संगठनों ने संकेत दिए हैं कि उनकी शेष मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में आगे की रणनीति पर फिर विचार किया जाएगा।
