हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर एक स्थानीय विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। कूड़ा उठान (डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन) योजना को लेकर शुरू हुई तकरार अब मंत्री और चेयरपर्सन के बीच खुले मतभेदों तक पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत नगर निकाय से जुड़ी एक योजना के संचालन और उसके क्रियान्वयन को लेकर हुई। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं, जिसके चलते मामला लगातार गरमाता जा रहा है।
स्थिति तब और चर्चा में आ गई जब विरोध और बयानबाजी का दौर हवन और शुद्धिकरण जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रमों तक पहुंच गया। इससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।
विवाद के बीच कई पार्षद भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। कुछ पार्षदों ने चेयरपर्सन के समर्थन में आवाज उठाई है, जबकि कुछ मंत्री के पक्ष में नजर आ रहे हैं। इससे स्थानीय राजनीति में गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है।
Bharatiya Janata Party के स्थानीय संगठन और वरिष्ठ नेताओं की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर स्थानीय निकाय के कामकाज और पार्टी की छवि पर पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और मामले के समाधान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है।
