हरियाणा में चर्चा का विषय बने 661 करोड़ रुपये के कथित IDFC-AU बैंक घोटाले को लेकर जांच और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर नए सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ IAS अधिकारी DK Behera ने मामले से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सवाल सार्वजनिक रूप से उठाए हैं, जिनमें बैंक खातों में गलत जानकारी दर्ज होने और उसकी सत्यापन प्रक्रिया प्रमुख मुद्दे हैं।
बेहरा ने सवाल किया कि बड़ी संख्या में खातों में कथित रूप से गलत या भ्रामक जानकारी कैसे पहुंची और इसे समय रहते पहचानने में संबंधित सिस्टम क्यों विफल रहा। उन्होंने यह भी पूछा कि डेटा एंट्री, सत्यापन और अनुमोदन की विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान निगरानी तंत्र ने क्या भूमिका निभाई।
मामले में यह भी प्रश्न उठाया गया है कि यदि रिकॉर्ड में त्रुटियां थीं, तो संबंधित विभागों, बैंकों और अधिकारियों द्वारा उन्हें पहले क्यों नहीं पकड़ा गया। बेहरा के अनुसार, इतनी बड़ी राशि से जुड़े मामले में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने जांच एजेंसियों से यह स्पष्ट करने की भी मांग की कि कथित अनियमितताओं की शुरुआत किस स्तर से हुई और किस-किस चरण में सिस्टम की चूक सामने आई। साथ ही उन्होंने डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुमोदनों की विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है और कई अधिकारियों व संबंधित पक्षों से पूछताछ भी हो चुकी है। जांच का दायरा वित्तीय लेन-देन, रिकॉर्ड प्रबंधन और कथित दस्तावेजी गड़बड़ियों तक फैला हुआ है।
हालांकि अभी तक मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की गहन पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत की कार्यवाही के आधार पर मामले में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
